निर्माण गतिविधियाँ
Thur Dec 7 2017 , 13:28:16

नवोदय विद्यालय समिति

Navodaya Vidyalaya Samiti

( An Autonomous Body Under MHRD ) Government Of India

प्रस्तावना

जवाहर नवोदय विद्यालयों की परिकल्पना उनके एकमात्र लक्ष्य-विद्या के मंदिरके रूप में की गई है। जवाहर नवोदय विद्यालय ऐसे आवासीय विद्यालय हैं जो उन पारंपरिक गुरुकुलों के समान हैं जिनमें विद्यार्थियों में अपनत्व एवं आत्मगौरव की भावना का विकास होता है।

अवसंरचना

जवाहर नवोदय विद्यालय के अपने स्कूल भवन, लड़कों एवं लड़कियों के लिए छात्रवास, भोजनालय एवं रसोई की सुविधा, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए आवास उपलब्ध हैं, जहॉं खेलकूद एवं मनोरंजन के लिए पर्याप्त खुली जगह होती है। स्व- श्री राजीव गाँधी, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री की स्मृति में सभी नवोदय विद्यालयों में एक स्मृति वन बनाया जाता है जो कि विद्यालय प्रांगण का एक अभिन्न अंग होता हैं। पहाड़ी क्षेत्रों के लिए जहां स्कूल भवन और केंद्रीय आंगन के साथ शयनागार ब्लाकों को शामिल नहीं किया जा सकता, मॉड्यूलर डिजाइन को अपनाया गया है। निर्माण की लागत को कम करने के लिए इन इमारतों को दो मंजिला बनाया जाता है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में सामग्री और विशिष्टताओं को स्थानीय केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग के मानदंडो के अनुसार अपनाया जाता है। भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में भवन निर्माण में विशेष उपाय किए जाते हैं । सभी नए जवाहर नवोदय विद्यालयों में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा उपाय किए गए हैं और शारीरिक रूप से विकलांगों के लिए अपेक्षित व्यवस्था की गई है ।

डिजाइन परिकल्पना

सामान्य

भवनों के जो डिजाइन तैयार किए गए हैं वे बहुत साधारण, कम लागत वाले तथा स्वदेशी प्रकार के हैं ताकि अपने परिवेश से अलग और अप्रिय न लगें। भौतिक स्वरूप की अपेक्षा आसपास के परिवेश के साथ इनके सामंजस्य पर बल दिया जाता है। सभी भवन एक/दो मंजिला और उपयोगकर्ताओं के अनुकूल बनाए गए हैं। भिन्न-भिन्न जलवायु एवं स्थलाकृतिक क्षेत्रों के लिए अलग तरह की छतों एवं भवन निर्माण सामग्री के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के डिजाइन अपनाए गए हैं।

विद्यालय

विद्यालय की इमारत में 14 क्लासरूम, 3 प्रयोगशालाएं, एक कम्प्यूटर कक्ष, एक पुस्तकालय, प्रदर्शन क्षेत्र, प्रशासनिक एवं स्टाफ कक्ष होते हैं। प्रत्येक कक्षा में 40 बच्चों के बैठने की व्यवस्था होती है। भौतिक शास्त्र, जीवविज्ञान, गणित एवं कम्प्यूटर के लिए प्रयोगशालाओं की व्यवस्था है। लड़कों एवं लड़कियों के लिए पृथक शौचालय उपलब्ध कराए जाते हैं। स्कूल के प्रवेश द्वार को आकर्षक रूप दिया गया है। प्रवेश करने के पश्चात एक प्लेटफार्म आता है, जिसे सभा के दौरान मंच के रूप में प्रयोग किया जाता है। केंद्रीय प्रांगण को सभा के मैदान के रूप में प्रयोग किया जाता है ।

छात्रवास

जवाहर नवोदय विद्यालयों में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों (एक विद्यालय में अधिकतम 560 छात्र)के लिए छात्रवास सुविधा उपलब्ध है। किसी आवासीय विद्यालय में विद्यार्थियों से अपेक्षा की जाती है कि वे आत्मनिर्भरता के साथ रहने की आदत, अनुशासन, मेहनत पर गर्व की भावना एवं बांटने की प्रवृत्ति सीखें। अतः आवास, प्राकृतिक रोशनी से परिपूर्ण, हवादार होने, आरामदायक एवं खुला होने के साथ-साथ सही वातावरण प्रदान करने वाला भी होना चाहिए। छात्रवास के डिजाइन पर विचार करते समय हमारे देश की उष्णकटिबन्धीय जलवायु के महत्वपूर्ण पहलू को ध्यान में रखा जाता है। इसीलिए छात्रवासों का ढांचा साधाारण बनाया जाता है, परन्तु रहने की दृष्टि से वे अति कुशल हैं। प्रत्येक विद्यालय में 6 छात्रवास बनाए गए हैं, जिनमें 4 लड़कों के लिए एवं 2 लड़कियों के लिए हैं और प्रत्येक छात्रवास में 96 विद्यार्थी होते हैं। छात्रवास में दो हाउस मास्टरों के रहने की व्यवस्था होती है (48 विद्यार्थियों हेतु एक)।

कर्मचारी आवास

प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रधानाचार्य का निवास स्कूल भवन के किसी उपयुक्त स्थान पर 106 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनाया जाता है । अध्यापकों के लिए 60 वर्ग मीटर क्षेत्र में बने 16 आवास, प्रत्येक प्रशासनिक स्टाफ के लिए 50 वर्ग मीटर क्षेत्र में बने 12 आवास तथा सहायक कर्मचारियों के लिए 40 वर्ग मीटर के 6 आवास होते हैं। विद्यालय में 60 वर्ग मीटर कुर्सी क्षैत्रफल का एक अतिथि गृह भी बनाया जाता है।

रसोईघर एवं भोजन कक्ष

560 छात्रों के लिए 757 वर्ग मीटर में रसोई घर के साथ एक बड़ा भोजन कक्ष होता है जहाँ सभी छात्र एक साथ एक ही समय पर भोजन कर सकते हैं।

सेवाएँ

इनमें विद्युत सबस्टेशन, एक लाख लीटर क्षमता की ओवरहैड टंकी एवं एक लाख लीटर क्षमता वाली भूमिगत टंकियाँ, सड़कें जल-मल निकास नालियां, जल आपूर्ति तथा वर्षा जल नालियां शामिल होती हैं। 190110 मीटर के खेल के मैदान जिसमें 400 मीटर रेसिंग ट्रैक, 4030 मीटर के दो खो-खो मैदान (लड़कों एवं लड़कियों, प्रत्येक के लिए एक), 40 30 मीटर के दो बास्केट बॉल मैदान होते हैं।

शारीरिक रूप से विकलांग छात्रों के लिए सुविधा

सभी नवनिर्मित जवाहर नवोदय विद्यालयों में शारीरिक रूप से विकलांग छात्रों के लिए बुनियादी और आवश्यक सुविधाएँ जैसे बाधा मुक्त रैंप और शौचालय उपलब्ध कराए जाते हैं यद्यपि कुछ ज.न.वि. जो पुरानी सी.बी.आर.आई. पद्धति के अनुसार निर्मित है, उनमे भी ये सुविधाएं चालू वर्ष के विशेष अभियान के अंर्तगत विस्तारित की गई हैं।

जवाहर नवोदय विद्यालयों की इमारतों के निर्माण-चरण

चरण-‘क’ (कुल कुर्सी क्षेत्रफल- 7660 वर्ग मी)

  1. विद्यालय भवन – इसमें 18 कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, प्राचार्य एवं उप-प्राचार्य कक्ष, स्टाफ कक्ष, विज्ञान प्रयोगशाला, कंप्यूटर प्रयोगशाला, चिकित्सा कक्ष, इत्यादि सम्मिलित हैं।.
  2. शयनशाला (2 वार्डन आवासों के साथ 96 छात्रों का एक खण्ड):
    1. लड़कों के लिए- 2 ब्लॉक (192 छात्रों के लिए)
    2. लड़कियों के लिए-1ब्लॉक (96 छात्राओं के लिए)
  3. कर्मचारी आवास: कुल l 23 स्टाफ आवासों का निर्माण किया
    1. टाईप-V – प्राचार्य आवास - 1
    2. टाईप-III - 14 जिसमें शयनशालाओं के साथ निर्मित 6 वार्डन आवास शामिल हैं।
    3. टाईप-II - 8 गैर शैक्षणिक कर्मचारियों हेतु
  4. रसोईघर तथा भोजनालय
  5. विकास कार्य: चहारदीवारी (2.6 मी, ऊंची) का निर्माण, सीवरेज एक लाख लीटर क्षमता की ओवरहैड टंकी एवं एक लाख लीटर क्षमता वाली भूमिगत टंकियाँ, आन्तरिक सड़कें, पथ बाह्य विद्युतिकरण, उप स्टेशन इत्यादि। .
  6. खेल के मैदान: (कुल संख्या 05 )
    1. 190 मी X 110 मी. का एक खेल का मैदान (जिसका ट्रैक 400/200 मी)
    2. 40 मी. X 30 मी. के दो खो-खो मैदान, (लड़कों एवं लड़कियों के लिए)
    3. 40 मी. X 30 मी. के दो बास्केटबाल मैदान, (लड़कों एवं लड़कियों के लिए)
  7. वर्षा जल संचयन प्रणाली

चरण-‘ख’ (कुल कुर्सी क्षेत्रफल- 3459 वर्ग मी)

  1. शयनशाला (2 वार्डन आवासों के साथ 96 छात्रों का एक खण्ड):
    1. लड़कों के लिए- 2 ब्लॉक (192 छात्रों के लिए)
    2. लड़कियों के लिए-1ब्लॉक (96 छात्राओं के लिए)
  2. कर्मचारी आवास: कुल 23 क्वार्टरों का निर्माण किया जाता है।
    1. टाईप-IV- उप प्राचार्य आवास – कुल संख्या 1 .
    2. टाईप-III – शयनगारों के साथ 04 वार्डन आवासों सहित कुल 14.
    3. टाईप-III - अतिथि गृह – कुल 01.
    4. टाईप-II - गैर शैक्षणिक कर्मचारियों हेतु कुल 05
  3. विकास कार्य: चरण – ख के भवनों के साथ जुड़े कार्य

चरण-‘ख’ (शेष)

  1. शयनशाला: शयनशालाओं का निर्माण छात्रों एवं छात्राओं की संख्या के आधार पर किया जाता है। महायोजना (मास्टर प्लान) पर निम्नानुसार विचार किया जाता है:
    1. लड़के-1 ब्लॉक (96 विद्यार्थियों हेतु)
    2. लड़कियों-1 ब्लॉक (96 विद्यार्थियों हेतु)
  2. विकास कार्य: चरण- ख (शेष) के भवनों से संबंधित कार्य 

वर्ष 2016-17 के दौरान निर्माण कार्य

  1. वर्ष के दौरान 15 जवाहर नवोदय विद्यालयों में चरण-‘क’ के अंतर्गत आने वाले भवनों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है। इस प्रकार 564 जवाहर नवोदय विद्यालय स्थायी भवनों में कार्यतर है और 15 ज.न.वि. में कार्य प्रगति पर है।
  2. वर्ष के दौरान 12 जवाहर नवोदय विद्यालयों में चरण-‘ख’ के अतंर्गत आने वाले भवनों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है। इस प्रकार 456 जवाहर नवोदय विद्यालयों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है और 58 ज.न.वि. में
  3. न.वि.स. की निर्माण विंग का मिशन है कि सभी विद्यालयों को प्रत्येक राज्य के जन-स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग से सीधे जोडकर और बिजली आपूर्ति को ग्रामीण से शहरी फीडर में जोडकर सभी ज.न.वि. को निर्वाध पानी एवं बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जाए।
  4. उन ज.न.वि. की बड़ी मरम्मत करने के लिए, जो खराब या लगभग जीर्ण स्थिति है, एक विशेष अभियान के रूप में जो के, सभी प्राचार्यों / क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि इनके पुनर्वास हेतु सीपीडब्ल्यूडी / केंद्र/ राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से एक अनुमान तैयार करवाएं।
  5. निधियों का उपयोग
    1. आबंटित निधि – रु. 603.77 करोड़
    2. उपयोग की गई निधि- रु. 482.80 करोड़ ।

वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान नई पहल :-

  1. हरित ऊर्जा का संचयन करने हेतु ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सौर ऊर्जा पीवी पैनल परियोजना का कार्यान्वयन एक नई पहल के रूप में में 252 ज.न.वि. में लागू करना।.
  2. विजली के बिलों में कमी के लिए न.वि.स. मुख्यालय द्वारा ऊर्जा लेखापरीक्षा आयोजित करना।
  3. स्टार रेटेड ऊर्जा कुशल उपकरणों के प्रावधान के साथ एलईडी आधारित प्रकाश व्यवस्था प्रदान करने के मानदंडों को संशोधित करना।
  4. निर्माण प्रक्रिया में गति एवं मितव्य्यता लाने और ज.न.वि. बेहतर प्रबंधन एवं कुशल संचालक हेतु साइट चयन प्रक्रिया में संशोधन करना।
  5. बेहतर दक्षता और आराम के लिए ज.न.वि. परिसर के सभी भवनों के आधारभूत डिजाइन में संशोधन करना।
  6. बेहतर कार्यक्षमता और लंबे जीवन के लिए ज.न.वि. भवनों के मानदंडों और विनिर्देशों का उन्नयन करना।
  7. सभी ज.न.वि. कर्मचारियों को उचित आवास उपलब्ध कराने एवं इनकी कमी को दूर करने के लिए कर्मचारी आवास की संख्या के मानदंड निर्धारित करना।
  8. नए बनने वाले सभी ज.न.वि. में वर्षा जल संचयन का प्रावधान करना।
  9. नए ज.न.वि. में इको फ्रेंडली बायो-रेमेडियल अपशिष्ट जल प्रणालियों को प्रावधान करना।
  10. डिजिटल इंडिया पहल को बढ़ावा देने के लिए वेबसाइट के माध्यम से अधिक से अधिक संप्रेषण के लिए न.वि.स. वेबसाइट को सुदृढ़ बनाना।
  11. क्षेत्रवार सेवा शुल्क के लिए खुली प्रतिस्पर्धी बोली-प्रक्रिया के माध्यम से कार्यों का आवंटन करना।
  12. उपयोग में लाने से पूर्व सभी भवनों का तीसरी पार्टी गुणवत्ता निरीक्षण करना।
जेएनवी का नाम राज्य निर्माण एजेंसी क्षेत्र
अंगुल ओडिशा एचएससीएल भोपाल
देवगढ़ ओडिशा केन्‍द्रीय लोक निर्माण विभाग भोपाल
रायगढ़ ओडिशा ओ.आई.आई.डी.सी. भोपाल
उज्जैन द्वितीय मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग भोपाल
किन्नौर हिमाचल प्रदेश केन्‍द्रीय लोक निर्माण विभाग चंडीगढ़
लाहौल & amp; स्पीति हिमाचल प्रदेश केन्‍द्रीय लोक निर्माण विभाग चंडीगढ़
जम्मू-दो जम्मू & amp; कश्मीर एचएससीएल चंडीगढ़
पूर्वी गोदावरी -2 (खम्मम -2) आंध्र प्रदेश एचएससीएल हैदराबाद
बांसवाड़ा द्वितीय राजस्थान यू.पी.जे.एन. जयपुर
श्रीगंगानगर -2 राजस्थान एचएससीएल जयपुर
वलसाड गुजरात यू.पी.जे.एन. पुणे
धुबरी असम ए.आई.आई.डी.सी. शिलांग
उदलगुड़ी असम ईपीआईएल शिलांग
आइजोल मिजोरम केन्‍द्रीय लोक निर्माण विभाग शिलांग
चम्फाई असम एम.ए.एम.सी.ओ. शिलांग